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Patna News: 1500 करोड़ की गंगा जलापूर्ति योजना को मिली मंजूरी, 2029 तक हर घर पहुंचेगा पानी

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Alam Ki Khabar | Patna News | Bihar News | राजधानी पटना में गंगा जलापूर्ति की 1500 करोड़ रुपये की बड़ी योजना, 75 वार्डों में 1200 किलोमीटर पाइपलाइन और 45 नए जलाशयों की तैयारी।

पटना, 12 अगस्त। आलम की खबर: राजधानी पटना में आने वाले वर्षों में पानी की आपूर्ति का पूरा ढांचा बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। शहर की बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ रही पेयजल की जरूरत को देखते हुए गंगा के पानी को ट्रीट कर घर-घर पहुंचाने वाली बड़ी परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। परियोजना के लिए बुडको ने सर्वे के बाद विस्तृत खाका तैयार किया है और करीब 1500 करोड़ रुपये की लागत से इसे जमीन पर उतारने की तैयारी है।

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे सिर्फ आज की जरूरत को पूरा करने के लिए नहीं बनाया जा रहा, बल्कि आने वाले करीब 35 वर्षों की आबादी और पानी की मांग को ध्यान में रखकर पूरा सिस्टम तैयार किया जा रहा है। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार, वर्ष 2029 तक योजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

पटना में पहले से जलापूर्ति का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। पटना नगर निगम के अनुसार शहर में करीब 1500 किलोमीटर जलापूर्ति पाइपलाइन बिछी हुई है और अलग-अलग इलाकों में जलापूर्ति केंद्र संचालित हैं। नई योजना इसी मौजूदा व्यवस्था को बड़े स्तर पर पुनर्गठित करने की दिशा में देखी जा रही है।

कंगन घाट और दानापुर दियारा में बनेंगे दो बड़े प्लांट

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत शहर के दो अलग-अलग हिस्सों में बड़े वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किए जाएंगे। पहला प्लांट पटना सिटी इलाके में कंगन घाट के आसपास और दूसरा दानापुर दियारा क्षेत्र में प्रस्तावित है।

दोनों वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता लगभग 375-375 एमएलडी रखने की योजना है। यानी दोनों केंद्र मिलकर बड़े पैमाने पर गंगा के पानी को शुद्ध करने के बाद उसे शहर की जलापूर्ति व्यवस्था में भेज सकेंगे।

गंगा से पानी उठाने के लिए इंटेक वेल और संप जैसी जरूरी संरचनाएं भी बनाई जाएंगी। इसका उद्देश्य यह होगा कि नदी से पानी लेने, उसे उपचारित करने और फिर पाइपलाइन के माध्यम से अलग-अलग इलाकों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया एक व्यवस्थित नेटवर्क के जरिए संचालित हो।

पटना के सभी 75 वार्ड होंगे योजना में शामिल

योजना का दायरा केवल कुछ चुनिंदा इलाकों तक सीमित नहीं रहेगा। अमृत 2.0 के तहत पटना नगर निगम के सभी 75 वार्डों को प्रस्तावित जलापूर्ति व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है।

घर-घर पानी पहुंचाने के लिए लगभग 1200 किलोमीटर नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव है। इसके साथ शहर के अलग-अलग हिस्सों में 45 नए वाटर टैंक और जल मीनारें बनाने की योजना है। पहले से मौजूद 11 जल मीनारों को भी नई व्यवस्था के साथ जोड़े जाने की तैयारी है।

इसका मतलब यह है कि परियोजना पूरी होने के बाद सिर्फ गंगा से पानी लाने की व्यवस्था ही नहीं बदलेगी, बल्कि पानी के भंडारण और उसे अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचाने का नेटवर्क भी नए सिरे से मजबूत किया जाएगा।

35 साल आगे की आबादी को देखकर तैयार किया गया सिस्टम

पटना की जलापूर्ति व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती आबादी है। इसी कारण परियोजना की योजना बनाते समय भविष्य की आबादी और पानी की मांग का अनुमान भी शामिल किया गया है।

परियोजना के अनुमान के अनुसार वर्ष 2029 में पटना की आबादी करीब 23.81 लाख तक पहुंच सकती है। उस समय पानी की जरूरत लगभग 406.259 एमएलडी आंकी गई है।

इसके बाद वर्ष 2044 में आबादी लगभग 28.08 लाख होने का अनुमान है और पानी की मांग बढ़कर करीब 477.899 एमएलडी तक पहुंच सकती है।

वर्ष 2059 तक पटना की आबादी 33 लाख से अधिक होने का अनुमान लगाया गया है। उस समय शहर को करीब 561.830 एमएलडी पानी की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी भविष्य की मांग को देखते हुए परियोजना की क्षमता और वितरण प्रणाली को डिजाइन किया जा रहा है।

प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन करीब 155.25 लीटर पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य भी योजना में रखा गया है।

57 जगहों पर जमीन की जरूरत

इतनी बड़ी जलापूर्ति परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए शहर में अलग-अलग संरचनाओं के निर्माण हेतु कुल 57 भूखंड चिह्नित किए गए हैं। इनमें जलाशय, संप, जल मीनार और परियोजना से जुड़ी दूसरी आवश्यक संरचनाएं शामिल हैं।

बांकीपुर तथा पटना सिटी/पटना पूर्वी क्षेत्र में जरूरी जलाशयों के लिए जमीन चिन्हित किए जाने की बात सामने आई है। कंकड़बाग क्षेत्र में आठ प्रस्तावित स्थानों में से सात के लिए जमीन उपलब्ध होने की स्थिति बताई गई है। वहीं पाटलिपुत्र इलाके में 10 में से पांच स्थानों पर जमीन चिन्हित की गई है।

जमीन की उपलब्धता इस परियोजना की गति के लिए महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि पाइपलाइन के साथ-साथ पानी के भंडारण और वितरण के लिए कई स्थायी ढांचों का निर्माण किया जाना है।

अगले महीने टेंडर की तैयारी

परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद अब अगला बड़ा चरण टेंडर का होगा। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार अगले महीने टेंडर जारी करने की तैयारी है। इसके बाद चयनित एजेंसी या एजेंसियों के जरिए निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।

बिहार में शहरी जलापूर्ति और सीवरेज से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं में बुडको की भूमिका पहले से है। हाल में बुडको की निविदा सूची में अमृत 2.0 से जुड़ी जलापूर्ति परियोजनाएं भी शामिल रही हैं।

सिर्फ पाइपलाइन नहीं, पूरी जलापूर्ति व्यवस्था बदलने की कोशिश

पटना में गंगा के पानी का इस्तेमाल जलापूर्ति के लिए कोई बिल्कुल नई अवधारणा नहीं है। मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार राजधानी में गंगा से प्रतिदिन करीब 220 एमएलडी पानी की आपूर्ति की जा रही थी और जलापूर्ति व्यवस्था में बुडको की भूमिका बढ़ाई गई थी।

नई प्रस्तावित योजना इसी दिशा को व्यापक स्तर पर ले जाने की कोशिश है। इसमें नदी से पानी उठाने से लेकर ट्रीटमेंट, भंडारण और पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचाने तक पूरी व्यवस्था को एक बड़े नेटवर्क के रूप में विकसित करने की योजना है।

अगर जमीन, टेंडर और निर्माण की प्रक्रिया तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है तो 2029 के बाद पटना की जलापूर्ति व्यवस्था मौजूदा ढांचे से काफी अलग नजर आ सकती है। खास तौर पर उन इलाकों को फायदा मिलने की उम्मीद है जहां गर्मी के दिनों में पानी की उपलब्धता और दबाव को लेकर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

हालांकि किसी भी बड़ी शहरी परियोजना की सफलता केवल घोषणा या मंजूरी पर निर्भर नहीं करती। जमीन की उपलब्धता, टेंडर प्रक्रिया, निर्माण की गति, पाइपलाइन नेटवर्क की गुणवत्ता और सबसे महत्वपूर्ण—ट्रीट किए गए पानी की नियमित आपूर्ति—इस परियोजना की वास्तविक सफलता तय करेंगे।

पटना जैसे तेजी से बढ़ते शहर के लिए पानी आने वाले वर्षों में और बड़ी जरूरत बनने वाला है। ऐसे में गंगा आधारित इस प्रस्तावित नेटवर्क को समय पर पूरा करना राजधानी की बुनियादी जरूरतों में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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गंगा का पानी तभी बड़ी सौगात बनेगा, जब हर नल तक नियमित पहुंचे

पटना के लिए गंगा सिर्फ नदी नहीं, बल्कि शहर की पहचान और भविष्य की कई योजनाओं का आधार है। गंगा के पानी को वैज्ञानिक तरीके से ट्रीट कर घर-घर पहुंचाने की योजना कागज पर निश्चित रूप से बड़ी पहल दिखाई देती है। लेकिन राजधानी के लोगों के लिए इसकी असली अहमियत तब होगी, जब नल में पानी नियमित आए, गुणवत्ता बनी रहे और गर्मी या किसी आपात स्थिति में आपूर्ति बाधित न हो।

1500 करोड़ रुपये की परियोजना और 1200 किलोमीटर पाइपलाइन जैसी विशाल योजना को केवल निर्माण परियोजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह पटना की आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा का ढांचा तैयार करने का प्रयास है।

इसके साथ पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है। जमीन अधिग्रहण, टेंडर, निर्माण की गुणवत्ता, खर्च और समयसीमा की लगातार निगरानी होनी चाहिए। शहर में पहले से मौजूद जलापूर्ति नेटवर्क को भी नई व्यवस्था के साथ बेहतर तरीके से जोड़ना होगा।

यदि योजना समय पर पूरी होती है और इसका संचालन मजबूत तरीके से किया जाता है, तो गंगा का पानी पटना के लाखों लोगों के लिए लंबे समय तक भरोसेमंद जलस्रोत बन सकता है। लेकिन लक्ष्य केवल पाइप बिछाना नहीं होना चाहिए—लक्ष्य होना चाहिए हर घर तक सुरक्षित, पर्याप्त और नियमित पानी पहुंचाना।

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